अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो कल सुबह Dhurandhar 2 की टिकट कटाने की सोच रहे हैं, तो रुक जाइए! पहले ये जान लीजिए कि आप थिएटर में कोई कहानी देखने जा रहे हैं या सिर्फ दो बड़े प्रोडक्शन हाउसेस की आपसी लड़ाई का हिस्सा बनने। सोशल मीडिया पर जिस तरह से इस फिल्म को लेकर माहौल बनाया गया है, वो साफ़ इशारा कर रहा है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। हम वो बातें करेंगे जो बड़े-बड़े पीआर (PR) वाले आपसे छुपा रहे हैं। Dhurandhar 2 का असली सच और Toxic के साथ इसका वो टकराव, जिसने बॉलीवुड से लेकर साउथ तक हड़कंप मचा दिया है।
क्या वाकई Dhurandhar 2 में दम है, या सिर्फ पुरानी यादों का सहारा?
अक्सर देखा गया है कि जब किसी फिल्म का पहला पार्ट हिट होता है, तो मेकर्स दूसरे पार्ट में सिर्फ नाम बेचते हैं काम नहीं। धुरंधर के पहले पार्ट ने जो स्वैग दिखाया था, क्या वो इस बार भी है? अब अंदर की खबर ये है कि फिल्म का दूसरा हिस्सा खींचतान कर बनाया गया है इसमें स्वैग vs स्क्रिप्ट हीरो का एंट्री सीन तो जबरदस्त है, लेकिन कहानी? भाई साहब, कहानी ऐसी है कि आपको लगेगा आप 90 के दशक की कोई घिसी-पिटी बदला लेने वाली फिल्म देख रहे हैं। इसमें डायरेक्शन का झोल ऐसा है की फिल्म के बीच-बीच में ऐसे कट्स हैं जो आपको कंफ्यूज कर देंगे। ऐसा लगता है जैसे एडिटर को फिल्म जल्दी खत्म करने की जल्दी थी।
Toxic के साथ क्लैश ये बॉक्स ऑफिस है या कुरुक्षेत्र?
असली आग तो यहाँ लगी है। एक तरफ Dhurandhar 2 का भारी-भरकम बजट और दूसरी तरफ Toxic का वो डार्क और रॉ (Raw) अवतार स्क्रीन की असली लड़ाई पीआर टीमें एक-दूसरे की टांग खींचने में लगी हैं। खबर है कि थिएटर मालिकों को धमकाया या लालच दिया जा रहा है कि वो किसी एक फिल्म को ज्यादा शो दें। क्या ये सिनेमा के लिए अच्छा है? बिल्कुल नहीं! इसमें ईगो की जंग हैं ये अब सिर्फ दो फिल्मों की कमाई की बात नहीं रही, ये दो बड़े सितारों के वर्चस्व की जंग बन गई है। कौन बनेगा साल 2026 का असली किंग?
पब्लिक का पैसा और 500 रुपये की टिकट क्या ये जायज है?
आजकल पीवीआर (PVR) में एक फिल्म देखना मतलब अपनी जेब पर डाका डलवाना है। पॉपकॉर्न और समोसे का खर्चा मिला लें तो एक मिडिल क्लास आदमी का पूरा बजट हिल जाता है। ईमानदार राय अगर आप सिर्फ एक्शन के दीवाने हैं और लॉजिक घर छोड़कर जा सकते हैं, तो Dhurandhar 2 आपको पसंद आएगी। लेकिन अगर आप कंटेंट के भूखे हैं, तो शायद आपको निराशा हाथ लगे। और मसाला या जहर फिल्म में गाली-गलौज और हिंसा इतनी ज्यादा है कि आप इसे अपनी फैमिली या बच्चों के साथ देखने की हिम्मत शायद ही जुटा पाएं। क्या एंटरटेनमेंट के नाम पर ये परोसना सही है?
वो 5 बड़ी गलतियाँ जो Dhurandhar 2 को ले डूबेंगी
कोई भी वेबसाइट आपको ये नहीं बताएगी, लेकिन हम यहाँ सच बोलने बैठे हैं बहुत ज्यादा लम्बाई फिल्म 3 घंटे के करीब है, जो आजकल के रील्स वाले जमाने में बहुत ज्यादा है। कमजोर विलेन हीरो जितना तगड़ा है, विलेन उतना ही कार्टून जैसा लग रहा है। बिना टक्कर के हीरो का स्वैग फीका पड़ता है। और इसके गानों का ओवरडोज हर 15 मिनट में एक गाना कहानी की रफ्तार को तोड़ देता है। और वही घिसा-पिटा क्लाइमेक्स आप फिल्म के आधे घंटे बाद ही समझ जाएंगे कि अंत में क्या होने वाला है। और PR का शोर जब फिल्म की तारीफ खुद फिल्म वाले ही ज्यादा करें, तो समझो फिल्म में दम कम है।
क्या आपको कल सुबह शो देखने जाना चाहिए?
हमारी सलाह मानिए, तो कल सुबह के पेड रिव्यूज (Paid Reviews) पर भरोसा मत कीजिये। सोशल मीडिया पर सब बिके हुए हैं। 2 बजे तक का इन्तजार कीजिये जब असली जनता थिएटर से बाहर निकलेगी और अपना सच्चा गुस्सा या प्यार निकालेगी। और टिप अगर आप क्लैश का मजा लेना चाहते हैं, तो Dhurandhar 2 और Toxic दोनों के ट्रेलर फिर से देखिये। जिसका ट्रेलर आपको अंदर से हिला दे, वही फिल्म देखिये।
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फिल्मों की भीड़ में खोता असली सिनेमा
Dhurandhar 2 हिट हो सकती है, करोड़ों कमा सकती है, लेकिन क्या ये आपके दिल में जगह बना पाएगी? ये एक बड़ा सवाल है। ये फिल्म एक चेतावनी है कि अब सिर्फ स्टार पावर से काम नहीं चलेगा, पब्लिक को कहानी चाहिए।
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