अगर आप कल सुबह Dhurandhar 2 की पहली टिकट कटाने की लाइन में खड़े होने की सोच रहे हैं, तो जरा रुकिए और एक लंबी सांस लीजिए। सोशल मीडिया पर जो ‘तूफान’ और ‘हाइप’ दिख रहा है, क्या उसके पीछे वाकई कोई दमदार कहानी है, या फिर ये सब सिर्फ एक महंगा मार्केटिंग का खेल है? आज हम इस फिल्म का वो ‘कच्चा चिट्ठा’ खोलेंगे जो बड़े-बड़े फिल्मी पंडित आपसे छुपा रहे हैं।
Dhurandhar 2 का स्वैग क्या हीरो का जादू अब भी कायम है?
फिल्म शुरू होती है उसी पुराने ‘धुरंधर’ अंदाज में इसकी धमाकेदार एंट्री, उड़ती हुई गाड़ियां और बैकग्राउंड में बजता वो कान फाड़ देने वाला म्यूजिक। हीरो ने मेहनत तो की है, उसकी बॉडी और उसके डायलॉग्स में वो पुराना जोश दिखता है, लेकिन भाई, सिर्फ ‘स्वैग’ से 3 घंटे की फिल्म नहीं चलती।
फिल्म के पहले 20 मिनट आपको कुर्सी से बांधे रखेंगे, लेकिन जैसे ही कहानी आगे बढ़ती है, आपको अहसास होने लगता है कि मेकर्स के पास दिखाने के लिए नया कुछ खास नहीं था। वही बदला, वही पुरानी रंजिश और वही घिसे-पिटे विलेन। क्या 2026 की ऑडियंस को अभी भी वही 90 के दशक का मसाला परोसना सही है?
कहानी में झोल या सिर्फ एक्शन का ओवरडोज?
आजकल की फिल्मों की सबसे बड़ी बीमारी यही है ड्रामा और एक्शन इतना ज्यादा कि कहानी दम तोड़ देती है। Dhurandhar 2 में भी यही हुआ है। हर 10 मिनट में एक फाइट सीन है। माना कि एक्शन देखने में मजा आता है, लेकिन जब बिना वजह के मुक्के चलते हैं, तो दिमाग थकने लगता है।
इसमें लॉजिक की कमी बहुत है फिल्म में ऐसे कई सीन हैं जहाँ फिजिक्स और लॉजिक को खिड़की से बाहर फेंक दिया गया है। और इमोशनल कनेक्ट में पहले पार्ट में भी हमें हीरो के दर्द से जुड़ाव महसूस हुआ था, लेकिन इस बार ऐसा लगता है कि हीरो सिर्फ ‘परफॉर्म’ कर रहा है, वो फील गायब है।
Also read- Dhurandhar 2 और Toxic Movie वो एक अभिनेता जिसकी वजह से यह दोनों फिल्म हो सकती है FLOP चलिए जानते है?
विलेन का किरदार जैसे शेर के सामने चूहा?
किसी भी फिल्म की जान उसका विलेन होता है। अगर विलेन तगड़ा न हो, तो हीरो की जीत फीकी लगती है। इस नई फिल्म Dhurandhar 2 में विलेन को सिर्फ चिल्लाने और डरावने चेहरे बनाने तक सीमित रखा गया है। और हीरो जब उसे मारता है, तो आपको खुशी नहीं होती, बल्कि लगता है कि चलो ‘सिर दर्द’ खत्म हुआ।
क्या ये Family Movie है? (कड़वा सच)
अगर आप सोच रहे हैं कि बच्चों और मम्मी-पापा के साथ जाकर ये फिल्म देखेंगे, तो सावधान! फिल्म में हिंसा (Violence) और भाषा का स्तर काफी ‘रॉ’ रखा गया है। इसमें खून-खराबा इतना ज्यादा है कि कुछ सीन्स में आपको अपनी आँखें बंद करनी पड़ सकती हैं। ये Dhurandhar 2 फिल्म पूरी तरह से ‘Mass Audience’ के लिए बनाई गई है जो सिर्फ शोर-शराबा पसंद करती है।
म्यूजिक और गानों का कचरा
Dhurandhar 2 फिल्म के गाने कब शुरू होते हैं और कब खत्म, पता ही नहीं चलता। कोई भी गाना ऐसा नहीं है जो आप थिएटर से बाहर निकलने के बाद गुनगुना सकें। बस शोर है जो आपके कानों में चुभता है। बैकग्राउंड स्कोर इतना लाउड है कि डायलॉग्स सुनने के लिए भी जोर लगाना पड़ता है।
वो 3 बातें जो आपको थिएटर जाने से पहले जान लेनी चाहिए?
Dhurandhar 2 में पैसों की बर्बादी अगर आप सिर्फ टाइम पास करना चाहते हैं, तो ठीक है। लेकिन अगर आप ‘सिनेमा’ की तलाश में जा रहे हैं, तो निराश होंगे। एक बात और लंबाई फिल्म की एडिटिंग बहुत ढीली है। 20-30 मिनट आराम से काटे जा सकते थे। सेकंड हाफ में फिल्म इतनी सुस्त हो जाती है कि आप अपना फोन चेक करने लगेंगे। और हाइप का सच याद रखिये, ट्विटर (X) पर जो ट्रेंड्स चल रहे हैं, उनमें से आधे ‘पेड’ होते हैं। असली रिव्यू तो कल दोपहर 12 बजे के बाद आएगा।
Also read- Toxic 2026 Rocking Star Yash
एक मज़ेदार बात और नाम बड़े और दर्शन छोटे?
Dhurandhar 2 बॉक्स ऑफिस पर तो शायद रिकॉर्ड तोड़ दे क्योंकि फैंस पागल हैं, लेकिन ये फिल्म ‘क्लासिक’ की लिस्ट में कभी नहीं आएगी। ये सिर्फ एक ‘वन-टाइम वॉच’ मसाला फिल्म है जिसे आप देखकर भूल जाएंगे। और अगर आपके पास फालतू पैसे और बहुत सारा खाली समय है, तो जरूर जाइये। वरना, ओटीटी (OTT) पर आने का इन्तजार करना ज्यादा समझदारी होगी।
| HOME PAGE | CLICK HERE |