दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में Faiz-e-Ilahi मस्जिद के पास अवेध जग़ह हटाने के लिए कि गई तोड़फोड़ के दौरान हाल ही में चर्चा में है। इस अभियान के दौरान मोहल्ले के लोग और मस्जिद के आसपास के लोग भड़क गए, जिससे वहा के माहौल में गरमा गर्मी पैदा हो गयी।
MCD और दिल्ली पुलिस ने अवैध निर्माण हटाने के लिए सुबह‑सुबह अभियान चलाया।
बुलडोज़र और भारी पुलिस फ़ोर्स की मौजूदगी के बीच मोहल्ले के लोगों ने गुस्से में आने के बाद पुलिस के ऊपर पथराव किया।
आखिर क्यों भड़के लोग ?
धार्मिक भावनाएँ मस्जिद के पास कार्रवाई होने से लोगों को लगा कि उनकी मस्जिद खतरे में है।अधिकारियों की जल्दीबाजी और देर रात की कार्रवाई ने माहौल में गर्मा गर्मी पैदा की। न्यूज़ चैनल्स और सोशल मीडिया पर वायरल खबरों और अफवाहों ने गुस्से को और भड़का दिया।
लोगों ने गुस्से में पथराव और विरोध किया।पुलिस ने टीयर गैस का इस्तेमाल करके हालत को संभाला।कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।
राजनीतिक नेताओं ने चर्चा और खुलकर बयान की मांग की।
High court के आदेश के मुताबिक सिर्फ अवैध निर्माण हटाए गए, मस्जिद को नहीं छुआ गया है।
प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई कानून और कोर्ट के आदेश से की गयी है।इस घटना से पता चलता है कि कानून और court के आदेशों को लागू करने से अक्सर समाज और धार्मिक भावनाओं से लड़ना पड़ सकता है।
प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच समझौते जरूरी हैं।अफवाहे और सोशल मीडिया पर फैलने वाली खबरें लोगों के गुस्से को बढ़ा सकती हैं।
दिल्ली के Faiz-e-Ilahi मस्जिद के पास हुए अवैध निर्माण को हटाने के अभियान ने यह दिखा दिया हैं कि कानून, प्रशासन और लोगो की भावनाएँ एक-दूसरे पर गहरा असर डालती हैं।
लोग इसलिए भड़क उठे क्योंकि उन्हें लगा कि उनकी धार्मिक और सामाजिक जमीन खतरे में है। यह घटना बताती है कि कानून का जनता के साथ खुलकर बात करना और समय पर सुचना देना कितना ज़रूरी है जिससे की माहौल में गरमा गर्मी पैदा न हो।
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